अभी मशरूफ हूँ थोड़ा।
अभी कुछ काम बाकी है।
अभी है रास्ता लंबा।
अभी विश्राम बाकी है।
यहां संघर्ष है जारी।
अभी दो-चार जीवन के
असल संग्राम बाकी हैं।
अभी तक तो यहां हमने
सुनी औरों की ही हरदम।
मगर अहले जहां को
मेरा भी पैगाम बाकी है।।
समर पहले ही दिन से छिड़
गया दुनियां में जब उतरा।
अभी भी लड़ रहा हूँ
युद्ध का अंजाम बाकी है।
ज़रा फुरसत मिली है
यार की महफ़िल में बैठा हूँ।
अभी कैसे चला जाऊं,
अभी तो शाम बाकी है।
अभी मत आंकिये मैंने यहाँ,
पाया या क्या खोया।
अभी अनुभव के मेरे और भी
आयाम बाकी हैं।
तबीयत से ज़रा देखो,
तो ईश्वर दिख ही जायेगा।
किसी मे कृष्ण बाकी है
किसी मे राम बाकी है।।
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