Saturday, April 9, 2016

सभ्यता की ओर



जब वसुधा थी जीवन -विहीन 
संसार समग्र तमोमय था ,
अज्ञान अम्बुनिधि लहराता ,
चहुंओर निरन्तर निर्भय था। 

कण कण में पृथ्वी के प्रतिपल 
घनघोर शिथिलता थी छाई। 
चेतना अचेतन सोयी थी ,
जड़ता लेती थी अंगड़ाई।

तब दूर कहीं दुर्गमथल से 
परिवर्तन की आंधी आयी,
जग ने त्यागा शैथिल्य और 
मृदु मंद-मंद नव गति पायी। 

विधि ने वसुधा के प्रांगण में ,
एक नव प्रकाश जो फैलाया ,
तम  दूर हुआ सार जग का,
स्वर्णिम  विहान भू पर आया। 

फिर अंतहीन सागर ताल से 
फूटा जीवन का एक अंकुर। 
जल -थल -अम्बर सब मुदित हुए ,
यूँ उमड़ी जीवन -धार मधुर। 

कलांतराल में धरती ने ,
मानव जीवन को जन्म दिया। 
हम सबने अपने कर्मों से।
धरती माता को धन्य किया। 


नैसर्गिक कृति पर हो विस्मित ,
मानवता थी अतिशय पुलकित ,
नव ज्ञान पुंज से आलोकित ,
जन मानस था अति आह्लादित। 

यह कोई देव -करिश्मा था ,
थी नए विश्व की परछाई। 
छिन्नकर कई अवरोधों को,
सभ्यता धरा पर थी आई। 

आसीन तरणि पर मानस की,
अब हम करने को सैर चले ,
शुचि ज्ञान समंदर के जल में,
अज्ञात कभी जो था पहले। 

उठती गिरती लहरों से जब,
नैनों के साक्षात्कार हुए। 
भावातिरेक मन में शब्दों के ,
कुछ ऐसे उदगार हुए। 

" इस नए विश्व में जन म न  में ,
नूतन ख़याल अब आएंगे ,
विज्ञान -कला  के विविध क्षेत्र ,
आयाम नए तब पाएंगे। 

मेदिनी स्वर्ग बन जाएगी ,
परिवर्तन ऐसे आएंगे। 
समृद्धि-सेतु निर्मित होगा ,
हम रत्न गगन के लाएंगे। "




Friday, March 25, 2016

Some important Results in number theory


Suchir derived the following important results in number theory:

A. Last two digits of 3^(3^(3^(...........(3^3))).....) is always 87 as long as the number of 3s in the sequence of exponents is 3 or more.

B. Last two digits of 7^(7^(7^(...........7^7))).....) is always 43 as long as the number of 7s in the sequence of exponents is 2 or more.

C. Last two digits of 13^(13^(13^(...........(13^13))).....) is always 53 as long as the number of 13s in the sequence of exponents is 2 or more.

Some other important results:

1. Any natural number being a perfect square cannot have its sum of digits a number which leaves a remainder 2,3,5,6 or 8 when divided by 9. In other words the beejank of a square number can only be 1,4,7 or 9

2. The beejank of a perfect cube can only be 1,8 or 9.

3. The beejank of a perfect fourth power can only be 1,4,7 or 9.

4. The beejank of a perfect 6th power of a natural number can only be 1 or 9.

5. The cube of any number leaves a remainder 1,6 or 0 when divided by 7.

5. The numbers (x^2-y^2), (2xy) and (x^2+y^2) generates a Pythagorean triplet for any natural numbers x & y. When x&y are co-prime we get a primitive Pythagorean triplet.

5.1 The product of any Pythagorean triplet is always a multiple of 60.

6. Any Right Angled triangle with hypoteneuse being a prime of the form 4n+1 or a multiple of a prime of the form 4n+1 can have all all sides integral in length. (* This follows from the Fermat's Theorem i.e. any prime of the form 4n+1 can be expressed as a sum of two squares).

एक सन्देश




इंतज़ार में बैठोगे कब तक तुम उषा-उदय की।
लील जा रहीं जग को ज्वालायें पाखण्ड-प्रलय की।
मत सोचो ऐ मनुज! स्वर्ग से देव उतर आएंगे।
अमिय वृष्टि कर जग की सारी पीड़ा हर जाएंगे।

तज तंद्रा देखो कैसी ये जर्जर हुई मही है।
सोचो इस जर्जरता का कारण क्या मनुज नहीं है ?
पर्वत, नदियां वायुमंडल सब बीमार पड़े हैं।
नाश सामने है पर सब निष्क्रिय निश्चिंत खड़े हैं
खनन चोट से धरती नित घायल होती जाती है।
व्यथित देखती रहती जंगल जल की बर्बादी है।
शिखरों पर जो बर्फ मुकुट थे, वे भी क्षीण हुए हैं।
बादल, जंगल, जल, मिट्टी सारे गमगीन हुए हैं।
नदी कहे मैं थी निर्मल अब नाला बना दिया है।
घोल रसायन जल को मेरे तुमने जहर किया है।
कुदरत ने जो रत्न गढ़े, लाखों अरबों वर्षों में।
तुमने उन्हें खपत कर डाले कुछ दशकों वर्षों में
वात सिसकती है ओढ़े धूंऐं की काली चादर।
जननी प्रकृति झेल रही, पुरुषों का नित्य अनादर।
ऊपर से कुछ लोग बैठ दंभों की मीनारों पर।
दाग रहे विध्वंस अस्त्र दुनियां के बाजारों पर।
अगर बुद्धि का मानव की उपयोग यही होना है।
सर्वनाश निश्चित है, सबकी नियति मात्र रोना है।
निशा दूर है अब भी भू पर, सर्वनाश है बाकी।
अगर अभी भी जग कर यदि सुध ले पाओ वसुधा की।
उठो, मनुज! झकझोरो, फिर से उदासीन निज मन को।
फिर से हरा भरा कर डालो अपने विश्व - चमन को।



मदिरा महिमा



दिल्ली हो या फिर ढाका हो
कर में प्याला मदिरा का हो
फिर हार जीत की फिक्र किसे?
हो चमत्कार कुछ फ़िक्र किसे?

हम तो मस्ती में पीते हैं
जीवन जी भर कर जीते हैं.
काहू से कोई बैर नहीं
सब अपने हैं कोई  गैर नहीं।

तुम नीम्बू पानी वाले ही
यूँ ही बस शीश खपाते हो।
कुछ बेफजूल की बातों पर
जाने क्या सुख तुम पाते हो?

ये अपना है वो बेगाना
नीम्बू पानी सिखलाता है
सारा जग है संगी साथी
ये मदिरालय बतलाता है।

एक बात अगर कहना मानो
तुम भी सच पाने की ठानो।
कल से तुम मदिरालय आओ
मदिरा का प्याला अपनाओ।

फिर ये जीवन सतरंगी है।
फिर सारे साथी संगी हैं।
ना  यहाँ मुसलमाँ है कोई ,
ना  ही मनुवादी संघी है।

हम मदिरा धर्म निभाते हैं
अरि को भी गले लगाते हैं।
सीधे सच्चे दिलवाले हैं।
सम्बल जीवन के प्याले हैं।

हम यहां अबीरी - स्पर्श बिना
दिल की दीवार ढहाते हैं,
चीयर्स बोलकर ही अपने
दुश्मन को दोस्त बनाते हैं।

चेहरे पर मेरे मत जाना
ये सत्य बयां कब करते हैं ?
दिल के रहस्य के अन्वेषी ,
मदिरा की राह गुजरते हैं।

मिल जाती प्याले संग लिए
जब हम मित्रों  की टोली है ,
हर शाम हमारी दीवाली,
हर सुबह हमारी होली है।

(अबीरी स्पर्श : गुलाल लिए हाथों का स्पर्श - होली के दिन )

(This poem was written on the day of Holi on 24th March 2016. Immediately, a day before, in a close World T20 encounter India won a close match against Bangladesh. Reference to Delhi and Dhaka is in the context of this match)