Sunday, February 8, 2026

कुछ मुक्तक

 १. एक छलावा, एक दिखावा। 

कब तक खुद से ही भागोगे? 

स्वप्न टूटकर सच सम्मुख,

आयेगा जब भी तुम जागोगे।


२. पेंगुइन हो क्या तुम जो,

अंटार्कटिका में बने रहोगे?

भटकल खग की भांति  तुम्हे,

भी दूर देश उड़ जाना होगा। 


३. खग को नीडों से निकल अकेले 

दूर गगन तक जाना था। 

नीडों को भी खग से बिछुड़न का,

दिल में दर्द छिपाना था।


४. शब्दों, संकेतों, ध्वनियों से।

कागज पर खिंची लकीरों से,

नर्तन करते कुछ पांवों से

कुछ चित्रों, रंगों, नूरों से। 

जो तुम तक कभी पहुंचती हूँ।

वो कलाकार की कला हूँ मैं।


५. होंगे दुनियां में धनकुबेर,

होंगे दौलत के लगे ढेर,

पर अपनी एक चवन्नी के,

सम्मुख सारी दौलत फीकी


६.  गगन का विस्तार अपरिमित 

रव्युदय जो हो रहा नित,

वात का चलना निरंतर,

नदी, निर्झर, पेड़, पत्थर।

प्रकृति ने जो कुछ दिए हैं

सब तुम्हारे ही लिए है।


७. नए साल में नए सफर में,

आ ही अगर गए हो तुम।

नई रीति से नवोत्साह से,

शुरू नया अध्याय करो।


८. सब लौट चुके हैं घर को,

हो चुकी शाम की बेला।

पूस की रात में भी मैं

खेतों पर खड़ा अकेला। 

चुपचाप बांट लेता हूँ,

जो कुछ आता सम्मुख है,

समझाऊं कैसे मिलता,

इस तप में कितना सुख है! 


९. परिमित जगत में मानवों 

की हैं अपरिमित ख्वाहिशें,

संग्राम पल पल ठन रहा,

अस्थिर व्यथित संसार में।

जीवन के मुश्किल ब्यूह में

सब इस कदर हैं जूझते,

जैसे कि सागर बीच हो,

नौका पड़ी मझधार में। 


१०. तुम विद्यानिधि, तुम विद्यापति,

तुम सरस्वती की वीणा हो,

साहित्य, कला के चरम शिखर,

तुम ज्ञान की अंतिम सीमा हो। 

फूलों का रंग तुम्ही से है,

पंचम बसंत भी तुझसे ही।

आलोकित दिव्य रश्मि से 

सारा दिग्दिगंत भी तुझसे ही। 


११. जीवन में तुम थोड़े में कभी,

ज्यादे में कभी रह जाते हो।

तुम शून्य कभी, संपूर्ण कभी,

आधे में कभी रह जाते हो।।


१२. होली का रंग उसी से है,

ये ढोल मृदंग  उसी से है।

आनंद तरंग उसी से है।

उल्लास उमंग उसी से है। 


१३. स्थितियों का तटस्थ आकलन। 

घटनाओं में दर्शन की तलाश।

सत्य-असत्य, उचित-अनुचित 

का विश्लेषण। 

किसी सिद्धांत का प्रतिपादन।

सर्वोचित विकल्प का सुझाव। 

कितना आसान होता है,

 जब खुद नहीं जीना पड़ता है 

 स्थितियों और विडंबनाओं को।

परिस्थितियों  के साथ जुड़ जाते हैं 

जब खुद के सरोकार।

 सारे दर्शन पीछे रह जाते हैं।

 सामने का संघर्ष 

सबसे बड़ी चिंता होती है।