Thursday, August 18, 2022

क्या लिखूं?

 

कुछ सावन की बरसात लिखो। कुछ बचपन की सौगात लिखो।

कुछ स्कूल -दिनों की याद लिखो। कुछ विघ्न और ब्याघात लिखो।


कुछ जीवन के अरमान लिखो। कुछ विघ्न और ब्यवधान लिखो।

जिस सीढ़ी से चलकर आये। उस की थोड़ी पहचान लिखो।


जीवन पथ पर चलते-चलते, देखे कैसे कैसे सपने?

कितनों ने खुद का साथ दिया? कितने पथ में बिछड़े अपने?


कैसे विद्यालय का प्रांगण, एक तपोभूमि -पूजास्थल था।

कक्षाओं की दीवारों में कैसे दिखता उज्ज्वल कल था।


कक्षाओं के अंदर बाहर ज्यामिति के चर्चे होते थे।

हाँ लिखो रसायन-भौतिक की चर्चा में कैसे खोते थे !


है याद तुम्हें एक छोटी सी वो "कालकोठरी" की चौकी?

लिख डालो कैसे नींव डली थी वहाँ अनगिनत सपनों की।


कैसे पड़ाव जब हुआ पूर्ण आगे को कर प्रस्थान चले।

स्मृतियों की गठरी को बांधे, मन मे लेकर अरमान चले।


जीवन के राग-उमंग लिखो।बहता आनंद -तरंग लिखो।

अरमा की डोर पतंग लिखो।होली के ढोल मृदंग लिखो


कैसे पथ में पत्थर आये, कैसे कब कब संग्राम हुआ।

लिख डालो कैसे थक जाने पर भी न तनिक विश्राम हुआ।
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