हाय री दुनियां तुम्हारी भी अनोखी रीत है ।
पनप बढ़कर फूलफलकर मुरझ जाती प्रीत है ।
जिस चतुर रचना-कुशल से ह्रदय की रचना हुयी,
अतुर-आकुल ह्रदय में जिसनी बड़ी सी चाह दी ,
दिल लगी को तोड़ना क्यों बनाया उसने भला,
जोड़कर दिल तोड़ने का क्यों चलाया सिलसिला।
सच कहूं अब ह्रदय का मंहगा बड़ा ब्यापार है,
शुद्ध शाश्वत प्रेम कर पाना बड़ा दुश्वार है।
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